हाइकू- प्रकृति

हाइकू- प्रकृति
1.बहती हवाए                                                     
  लहराते हरेभरे खेत
   चंचल मन

2.कोयल की कुक
  दिल में मिठास
  सुरीला गीत

3.नदिया की धारा
  सागर मिलन की उमंग
  लंबे रास्ते

4.हरियाली छाई
  धरती सजी है
  नया अंकुर

5.तितली फुलो पर
   रंगबिरंगी समा है
   मधु चुनती

6.भंवर की गूंजन
   खूबसूरत फूल ढूँढना
   छुपना है

7.सूरज की लाली
   गालो पर मेरी
   शर्माउ मैं

8.नीला आसमान
  चारो दिशाओ में अस्तित्व
  विशाल हृदय

9.परबतो की बस्ती
  उँचाई को छुना चाहे सब
   पत्थेर दिल

10.प्रकृति दुल्हन बनी
     अंतरमन प्रसन्न हुआ
     मुस्कान खिली
 
 

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दीदार

दीदार

खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात
सज   कर बैठी है
नही करती किसीसे बात

कुछ भी कहो ,गुलाब सी शरमाए 
पलकों को झुकाए,नयनो से मुस्कुराए

शायद मेरी बन्नो,थोड़ी सी इतराए
पवन के छूअन से भी,थोड़ी सी सहराए 

मुखमंडल पर उसकी,चँदनी का तेज
रंगबिरंगी फूलों से महेकती उसकी सेज

ओढ़ के घूँघट हया का
अपने साजन का करती इंतज़ार

हम भी अब चले यहा से
के बन्ना आया है करने
दुल्हने चाँद का दीदार.

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