तुम कहती रहो

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तुम कहती रहो , हम निहारते रहे
साथ पल यू ही गुज़ारते रहे

शमा की जरा सी रौशनी में बैठे
घूंघराली लट गालों पे सवारते रहे

बीच में आए कुछ खामोश लम्हात्
निगाहों से जज़्बात दुलारते रहे

कही आहट हुई ,हड़बड़ा के जागे नींद से
तुम ख्वाब से ओझल , हम पुकारते रहे..

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तेरी याद में

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शाख से पत्तों को गिरते देखा
तेरी याद में एक और दिन गुजरते देखा

कितनी अजीज हो तुम इस दिल से पूछो
आइना-ए-मन हर आहट पे सवरते देखा

सितारों जितने सारे इंतज़ार के लम्हात
रातों में उन्हें अक्सर टूट के बिखरते देखा

यूही शाम ढलते

यूही शाम ढलते तेरा चुपके से आना

परदे के पीछे खड़ी होकर मासूम मुस्कुराना

 

चाय का लुत्फ़ लेता अख़बार में खोया मैं

हवाओ संग लफ़्ज़ों का कानो में गुनगुनाना

 

हक़ीक़त थी तुम कभी,आज वक़्त का साया हो

याद बहुत आए तेरा दिल पे दस्तक दे जाना

हर सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी

हर सदी इश्क़ की  नयी कहानी होगी
राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |

मत छेड़ो दुल्हनदिल को इस कदर
हथेली खिली महेंदी  शरमपानी होगी |

क़ानून की ज़रा मजबूरी तो समझिए
सज़ा मिली हर हस्ती जानीमानी होगी |

चुनाव में इस बार कोई दोगला खड़ा
वोट संभल कर दीजिए मेहेरबानी होगी |

पूछवालों की वफ़ा को जोड़िए सत्ता से
ये उनके प्रति हमारी बद ज़ुबानी होगी |

हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी |

बेसबब वो रूठना

यूही किसी को सताना कभी अच्छा होता है
 प्यार में खुद  तड़पना कभी अच्छा होता है |

रिश्तों की नज़दिकोया बनाए रखने के लिए
दूरियों का  उन में आना कभी अच्छा होता है |

अन चाहा गुबार मन से बह जाने के लिए
आसुओं का निकल जाना कभी अच्छा होता है

मचलते आज़्बात दिल से कहने के लिए
खामोशियों का तराना कभी अच्छा होता है

ज़िंदगी में कदम आगे बढ़ाने के लिए
ठोकरों का नज़राना कभी अच्छा होता है

दुनिया के रंगीन नज़ारे देखने के लिए
खुशियों में बहकना कभी अच्छा होता है

इश्क़ की गहराई को समझने के लिए
बेसबब वो रूठना कभी अच्छा होता है.

चैन – ओ -अमन नदारद हुए

चैनअमन नदारद हुए कई दिल से
सुकून की घड़ियाँ नसीब बड़ी मुश्किल से |

वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रही
और देते मासूमो को जख्म जलते कील से |

नन्हे  हाथों  में  बारूद – बंदूक  थमा दी  है
छिन किताबबस्ता मदरसे में जमील से |

राहरहमपैगाम हुआ रुखसत
सिखाते नोच खाना अपनो को गीदड़ चील से |

कब ख़ालसा होगा इनका या डरता है मौला
रहमतइंसानियत हो तेरी जादुई झील से |

तस्वीर के भी ना जाने कितने पहलू

 हसते हसते  हर बार कुछ अश्क़ निकल आते है
बस यही नही मालूम वो खुशी के थे या छुपे गम के  |
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आरज़ू अंबार लगे है दिल में हमारे इतने
कौनसी पूरी हो यही नही पता मुश्किल में खुदा भी |
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ना जाने हवाए कब रुख़ बदल दे अपना ज़िंदगी में कही और तुझसे
खुशी का हर लम्हा मिलता है जो पलछिन उसे संभाले रख लेना  |
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तस्वीर के भी ना जाने कितने पहलू नज़र से छुपे छुपाए रह गये
इश्क़ में कतल कर हमारा ,वो इल्ज़ाम हमी पे लगाए चल दिए |

दिल में बहुत प्यार है बाकी

दिल में बहुत प्यार है बाकी अब भी तेरे लिए सरताज मेरे
कभी मिलकर भी साथ छूट जाता है इस में कुछ भलाई हो |

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क्यूँ कही सुकून नही इस दिल को आज मेरे
एक बसेरे की ख्वाहिश खुदा तुझे महेंगी लगी |

हम तो आगे जाने की कोशिश

हम तो आगे जाने की कोशिश में थोड़े कामयाब भी हुए जानिसार
मन वही अक्सर रुकता है जहा तेरी यादें बिखरी महकती अभी तलक |

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या खुदा क्या खता हुई मुझसे बतादे भूले से
दिल को किसी के घायल होने का इल्म हुआ है |

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बहुत एहसासो से

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बहुत एहसासो से गुज़रे है ज़िंदगी तेरे इशारों पर नाचते हुए
रोटी के एक टुकड़े से प्यारा हमे और कुछ भी नही यही जाना |

 

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