शृंगार

शृंगार

1.बिंदिया,झुमका,पायल,बाजूबंद मैं सब कुछ पहनकर आउ
   एक काला तीट मुझे लगाना, सब की नज़र से मैं बच पाउ |

2.पिया लुभावन, हर दिन में दुल्हन , चाहे सोला शृंगार करे
   शृंगार उसका अधूरा लागे,जब तक ना सिंदूर से माँग भरे |

3.गोल गोल जो सदा घूमत रहे, मुझे वो ही गरारा चाहिए
   पिया मिलन से मैं शर्माउ,चहेरा छुपाने ओढनी भी लाइए |

4.किन किन करते कंगना मेरे,खनक खनक सब कुछ बोले है
   लाज के मारे लब सिले है , तब कंगना दिल के राज़ खोले है |

5.ठुमक ठुमक जब गोरिया चले है ,उसकी तारीफे कीजिए गा
    रूठे जो सजना से गोरी ,मनाए खातिर, नौलखा दीजिए गा |

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वो तुम ही तो हो

वो तुम ही तो हो

रहता है जो इन झील सी निगाओं में
बन कर ख्वाब मेरे,वो तुम ही तो हो |

नाम लेती हूँ जिसका मेरी सांसो में
ज़िंदा हूँ मैं जिस कारण,वो तुम ही तो हो |

सुनना चाहूँ मैं हर पल अपने कनखियो से
जो मधुर मीठि वाणी,वो तुम ही तो हो |

जो दौड़ता है मेरी नस नस में लाल रंग
पहुचता है दिल तक मेरे,वो तुम ही तो हो |

किसी भी मोड़ पर,ज़िंदगी की राहों में
जो शक्स मिलता है मुझे,वो तुम ही तो हो |

जो बहता है बनके गीत मेरी अधरो पर
वो नज़्म खालिस,वो तुम ही तो हो |

जो चलता है हर वक़्त साथ साथ मेरे
वो अपनासा साया , वो तुम ही तो हो |

पहना है जिस्म पर मेरी जो शृंगार
वो खूबसूरत गहना,वो तुम ही तो हो |

जिस अज़ीज़ के बिना मैं हूँ अधूरी अधूरी
मुझे सपूर्ण करनेवाले,वो तुम ही तो हो |

जिसे माँगा है हमने खुदा से इबादत में
वो दुआ हमारी,वो तुम ही तो हो |

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