सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है

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तुम्हे देख  हमनशी कदम खुद  खुद चलते है
बड़ी मुश्किल से जज़्बादिल हमसे संभलते है |

मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे
महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच  निकलते है |

अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा जिगरजान को हमारी
मोहोब्बत के गवाहचिराग रौशन होके जलते है |

महबूबआफताबजहन के राज़ –ख़यालात यहाँ
वो भी महजबीदिलकशी से मुलाकात हो मचलते है |

फलकआईने से निगाहे निसार  नही होती गुलशन आरा
आपकी आरज़ू में झिलमिल सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है. |

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मुट्ठी भर चाँदनी

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1.मुट्ठी भर चाँदनी

पहेले रोज़ खिड़की पर आता था
रात रात हमसे बतियाता था
भोर की रश्मि आने पर भी
हमे  छोड़ के जाता था
आज कल हमे देख कर
बादलों के पीछे छुप जाता है
अक्सर नज़र भी नही आता है
कोई गुनाह तो नही हुआ हमसे?
एक बार बस रात को रौशन करने
मुट्ठी भर चाँदनी ही तो
उधर माँगी थी चाँद से…….

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 2.चाँद के रूप

पौर्निमा की रात 
चाँद को
शर्मा कर खिलते हुए
मंद मुस्काते हुए
पूरी दुनिया ने देखा होगा
अमावस पर 
चाँदनी के बिना 
अकेले में रोते हुए 
उसे सिर्फ़ हमने देखा है |