दो हाइकू

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सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से उठकर
हम अक्सर उनकी गोद में समा जाते है | बिन कहे ही
वो कुछ ऐसी खुशबू ले आती है,की बस,दिल खुश हो जाता है |
उस खुशबू के बिना तो पैरों के पहिए चलते ही नही |

 . चाय की चुस्की
    तेरी हाथों से बनी
     दिन सुहाना

उपरवाले ने भी ये ममता की मूरत बड़ी फुर्सत में बनाई होगी |
इतनी सहनशीलता,प्रेम,निस्वार्थ,त्यागी, और  जाने हमारे 
एहसास उन तक मिलो दूर से भी कैसे पहुँच जाते है | दिल जान 
लेता है , लफ़्ज़ों की ज़रूरत ही महसूस नही हुई कभी |

   मेरे मन के
    राज़ अनकहे से
    कैसे समझी

सच ही तो कहते है जहा उपरवाला नही जा सका,उसने मा भेज दी |

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ऐसी हर सहर कीजिए

ऐसी हर सहर कीजिए 

नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए 
दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | 

पैगाममोहोब्बत भेजा है खत में नाज़निन
बुल हो  गर तोहफाइश्क़ हमसे नज़र कीजिए | 

खुशियाँ बाटने यहा चले आएँगे अनजान भी
किसी के गम में शरीक अपना भी जिगर कीजिए | 

आसान राहों से जो हासिल वो भी कोई मंज़िल हुई
खुद को बुलंद करने तय  मुश्किल सफ़र कीजिए | 

दुश्मनजहाँ के तोड़ रहे है मंदिर मज़्ज़िद
अपने गुनाहो की माफिएअर्ज़  अब किधर कीजिए | 

लहू के रिश्तों से भी मिले अब फरेब – खंजर
परायों से अपनापन नसीब वही बसर  कीजिए | 

ज़मीन समेट्ले बूँदो से वो बादल है प्यासा
आसमान झुके पाने जिसे  प्यार इस कदर कीजिए | 

गुलाब से सजाए लम्हे भी मुरझाएंगे कभी
यादों में उनकी “महकरहे ऐसा असर कीजिए |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उन ओस की बूँदो का आना

उन ओस की बूँदो का आना

लालिमा की चुनर पूरब पर लहराए
मंद मंद बहती ये शीतल हवाए
खिली कुसुमीता मध्यम मुस्कुराए
फ़िज़ाए जब उसे छूकर गुजरती
अपनी महक हर दिशा में बिखराए
छम छम करती किरनो की पायल
रौशन करती जीवन का हर पल
कही दूर से आए बासूरी की गूंजन
उल्हासित,प्रफूल्लित होता ये मन
कही पंछीयो का किलबिल चहकना
पन्नो का सरस्वति के राग छेड़ना
नाज़ुक , तरल , हसती , दर्पणसी
उन ओस की बूँदो का आना
अपना प्यार पंखुड़ियो पर जताना
ओस की दर्पण में तुम नज़र आते हो
हर बूँद के साथ अपना प्यार दे जाते हो
तुम्ही हो मेरे इस जीवन की आकांक्षा
इसलिए हर सुबह सिर्फ़ तुम्हे देखने
करती हूँ ओस की बूँदो की प्रतीक्षा.

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