हाइकू – सवेरा

हाइकू – सवेरा

1. पंछीयो की किलबिल
    सूरज निकलते ही
    घरौंदा छोड़े

2. चाँद छुप गया
    चँदनी खो गयी
    अधूरे स्वप्न

3. दव की बूँदे
    फूल खिले है
    महेकती ताज़गी

4. घना सा कोहरा
   पत्तियों का जाल
   चमकी किरने

5. अरुण रथ दौड़ा
    एक नया दिन
    रौशन जहाँ

6. अख़बार के पन्ने
    चाय का प्याला
    तरोताज़ा दिन

7. प्रभु का नाम स्मरण
    शंख का नीनाद
    आशीर्वाद पाए

8. रंगो की चुनरी
    अंबर भी शरमाये
    भोर हुई

9. भीगे है गेसू
   गालो पे लट है
   मनमोहक अदा

10. काम पे जाना
    अपनो से दूर
     ज़िंदगी है

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हाइकू- प्रकृति

हाइकू- प्रकृति
1.बहती हवाए                                                     
  लहराते हरेभरे खेत
   चंचल मन

2.कोयल की कुक
  दिल में मिठास
  सुरीला गीत

3.नदिया की धारा
  सागर मिलन की उमंग
  लंबे रास्ते

4.हरियाली छाई
  धरती सजी है
  नया अंकुर

5.तितली फुलो पर
   रंगबिरंगी समा है
   मधु चुनती

6.भंवर की गूंजन
   खूबसूरत फूल ढूँढना
   छुपना है

7.सूरज की लाली
   गालो पर मेरी
   शर्माउ मैं

8.नीला आसमान
  चारो दिशाओ में अस्तित्व
  विशाल हृदय

9.परबतो की बस्ती
  उँचाई को छुना चाहे सब
   पत्थेर दिल

10.प्रकृति दुल्हन बनी
     अंतरमन प्रसन्न हुआ
     मुस्कान खिली