बूंदो की खनक में

 

बूंदो की खनक में
 ढूँढती हूँ अक्सर
वो छुपा हुआ अक्स तेरा
तुम भी जब खिलखिलाते
जैसे छम छम बूंदे
बजती थी |

बरसात की बूंदे
हथेली पर् लेकर
एक कोशिश करती हूँ
उन्हे छुपाने की
ताकि बहते पानी संग
तुम भी न बह जाओ |

बूँद में तुम्हे देखना
खयाल अच्छा लगता है
जितनी बूंदे होती है
तेरी उतनी ही तस्वीरे |

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