होली मुबारक

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होली 

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मन में घुली मीठी गुझिया सी बोली हो 
प्यार के रंग लगाओ दुश्मन या सहेली हो |
गुबार वो बरसों से पलते रहे है दिल में
नफ़रत पिघलाती मिलन सार ये होली हो | 
गुस्ताखियों के अरमानो की लगती है कतारें 
हर धड़कन की तमन्ना उसका कोई हमजोली हो | 
जज़्बातों की ल़हेरें ऐसी  उठाता है समंदर
दादी शरमाये इस कदर जैसे दुल्हन नवेली हो | 
मुबारक बात दिल से अब कह भी दो “महक” 
आप सब के लिए होली यादगार अलबेली हो |

    //2//

छाई खुशियों की बौछार
के आई है होरी
मीठी गुझिया,मीठा मोरा सैय्या
दोनो पे टिकी होये
इस दिन नज़र हमारी

बड़ी स्वादिष्ट सी गुझिया
हाय,खाने को जियरा ललचाय
लागे एक ही बारी में
स्वाहा करूँ सारी
छुपाय के सबसे खाना पड़त है
देखे कोई ई न कह दे
बहुरिया घर की,सब से चटोरी.

देख सलोना भोला सैय्या
गोरियों का दिल मचल जाय
नटखट सखियाँ धोखे से
सजनवा को भंग पीलाय
जानत मस्ती,पर मन घबराए
कोई मोरे सैययांजी की
कर ले ना चोरी.

भूल,ख़ता माफ़,मन की स्लेट कोरी
रंगों से सजी हो सब जन की होरी.

-महक

http://merekavimitra.blogspot.com/2008/03/33-2-1.html

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