अंधेरे से उजाले तक

है ना बहुत गहरा अंधेरा है,
तेरे आसपास का कुछ भी
दिखाई नही दे रहा
झुंझलाहट,क़ैद का आभास
अंधेरों में गुम होती आवाज़े
कोई रोशनदान भी नही
अगर तुम महसूस करोगे
सब की हालत तेरे जैसी है
कोई मद्दत के लिए नही आएगा
इधर उधर टुकूर -२  क्या देख रहे हो
मैं हूँ,तुम्हारे अंदर का चिराग
थोडिसी हिम्मत कर,जलाओ मुझे
धुआँ उठेगा,साँस चढ जाएगी
पर साथ थोड़ी रौशनी भी आएगी
वही तुम्हे राह दिखाएगी
अंधेरों से उजाले तक का
तुम्हारे अस्तित्व का सफ़र
तय करने के लिए….

 

 

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दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर

नन्हे से दीपक में सजाई बाती
रौशनी चारों तरफ,निखरी हुई ज्योति
हर पल तप तप कर तुम हो जाना प्रखर
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

अंधेरी गलियों में जो हम भटक जाए
तेरे उजियारे से मन की प्रज्वलित हो आशायें
मुश्किलें आए तो साथ निभाना शामसहर
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

तूफानो के काफ़िले आएंगे गुजर जाएंगे
कोशिश होगी तुम बुझ जा,चुभेंगी हवायें
विश्वास के बल पर  हो जीवन का सफर
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

अपने लौ को सदैव मध्यम ही जलने दो
प्रकाश पर खुद के कभी घमंड  हो
प्रेरणा बनो सबकीदिखाना राहनज़र
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

roshni

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 ज़िंदगी में जब होता नही है मनचाहा
लगता जैसे दिल ने,सारा दर्द है सहा
खुली आँखों से भी नज़र आता है अंधेरा
ढूँढ कर भी जब,नही मिलता कश्ती को किनारा
उमीद की नन्ही किरण से,मिलता है हौसला
रोशनी की राह बन जाता,मोंम का उजाला.