mehek

 ना कोई छू पाए
ना कोई कर सके दीदार
फूलों में मेरा बसेरा
और ज़िंदगी से मुझे प्यार
बन गई तेरी दीवानी
इस का भी इज़हार
हवा संग उड़ जाओ बन तितली
और बिखेरू खुसबु
यही मेरा काम
मेहसूस करो ना मुझे
मेहेक मेरा नाम.

महक हमारा नाम,जो आप सबसे हमारा परिचय करता है.
हमे कविता,शेर,शायरी,ग़ज़ल इन सबसे ख़ास लगाव है.
साथ साथ ही हर किस्म की फूलों से बेहद प्यार है.वो सुबह सुबह कलियों का खिलना,रे से मिलना,
सुबह की सुर्ख़ लाली,और  की बूंदो का गिरना,फ़िज़ाओं संग महक की ताज़गी ना,प्रकृति का ये सजीला रूप
हमे हरदम रास आता है.
  हम आप सब का अपने पन्नो पैर स्वागत करते है.आशा है आप अपनी पसंद ,नापसंद,प्रतिक्रिया,ज़ाहिर करके,
अपने दिल की बात हमे बताएँगे. हम हर शब्द को राखों पर रख कर,और अच्छी कविता लिखने का 
प्रयास करेंगे.शुक्रिया.

38 टिप्पणियाँ

  1. दिसम्बर 3, 2007 at 10:02 पूर्वाह्न

    savagat hai Aapka🙂 mehek jee
    Aasha hai aapke is blog par behtareen rachnaye padne ko milti rhengi
    Aaj pheli baar aapke bog par aana hua. aur mehak jee ki mehek ka ehsaas ho gya…
    Aap likhte rhein isi shubh kamnaa ke sath
    main aaj kisi rachna par pratikriya nahi kar payi par jaldi karungi🙂
    thodaa tasli se pad kar🙂
    Saadar
    Hem jyotsana

  2. ikshayar said,

    दिसम्बर 14, 2007 at 7:42 पूर्वाह्न

    Hi Mehekk.. are you on Yoindia too ?

    If you can then show can show latest original poems from various original poets like you here in side bar..

    ADD This RSS in RSS widget under presentation:
    http://www.yoindia.com/shayariadab/index.php?type=rss;action=.xml;limit=15;sa=news

  3. S A R Hashmi said,

    दिसम्बर 24, 2007 at 5:43 पूर्वाह्न

    आज आप की कविताएँ पढ़ने का अवसर मिला , रचनाएँ सुन्दर हैं और उनसे भी सुंदर हैं सपनों का संसार
    साहिर हाशमी का एक शेर लिख रहा हूँ जो उस अनाम भावुकता का परिचायक है जिसे महक भी कहते हैं
    इलाही कौन सा जज़्बा है इन नाज़ुक से फूलों में
    यह उन हाथों को महकाते हैं जो इनको मसलते हैं

    • champak said,

      दिसम्बर 1, 2009 at 2:03 अपराह्न

      hello हासमी साहब .आपकी इस अनाम भावुकता ने mehek के उस दंभ को तोड़ दिया है जिसका सहारा ले खुद को मेहेकने और सारी दुनिया को महकने का ये अभिमान करती हैं .mehek से मेरा मतलब हमारी माननीय महक जी से नहीं है ..आशा है आप समझ ही रहे होंगे ..इतने सुन्दर भाव से हमारा परिचय करने के लिए शुक्रिया ..साथ -साथ अपनी महक जी से भी मैं शुक्रिया कहना चाहता हूँ के उन्होंने एक ऐसा platform बनाया है .महक जी आपकी कवितायें तथा कविता को और सुन्दर बनाने की जो इच्छा व्यक्त की है आपने .वो काबिलेतारीफ है . .आप दोनों को बहुत -बहुत धन्यवाद .!

  4. amitkumarshahi said,

    दिसम्बर 29, 2007 at 9:12 पूर्वाह्न

    Behatrin ! mahak ,
    aapki kavitayein bahut sundar hai

  5. वाचून बघा said,

    जनवरी 6, 2008 at 9:24 पूर्वाह्न

    महेकजी,

    सर्वप्रथम आपकी असाधारण प्रतिभाको मेरा विनम्र अभिवादन !

    फिर आपका अभिनंदन, के सौभाग्यवश विधाताने आपको इतनी सुंदर अभिव्यक्तिके माध्यमरुप चुना और आपभी उसे यह खूबसुरत अंजाम दे पाईं.

    अबतक पढी लगभग सभी रचनाओंपर कुछ न कुछ अभिप्राय लिखनेका मन हुआ, क्योंकी आपकी कविता सीधे पाठकके दिलमें उतरनेकी शक्ती रखती है. अंतर्गत भावुकता, प्रवाही प्रतिभा उसका स्थायी भाव लगता है. हर रचनाका सौष्ठव और गेयता बढानेवाले सुंदर शब्दोंका प्रयोग, उसपर इतने भिन्न विषयोंपर परिपक्व विचारोंका प्रदर्शन ! आपका काव्य पढना एक अनोखी, मनोहर अनुभूती रही जिसने मुझे बहुत प्रभावित और आनंदित किया.

    आपके चिट्ठेका सैर-सपाटा करने निकला था. इस सफरके बीचही जबरन अपनेको रोककर आपको यह बताना उचित समझा– आपको पूरा पढनेके बाद शायद कुछ लिखनेके पात्र ना रहूं !

    यूंही लिखती रहियेगा, आपकी कलमकी यह सिद्धी बनी रहे !

    धन्यवाद और शुभकामनाओंसहित,

    सादर,

    सतीश वाघमारे .

  6. mehek said,

    जनवरी 6, 2008 at 1:03 अपराह्न

    Aap sab ka tahe dil se shukran.

  7. nikhil anand giri said,

    जनवरी 6, 2008 at 6:16 अपराह्न

    मेरी कविता पर टिपण्णी करने का बहुत-बहुत शुक्रिया…आगे भी प्यार बनायें रखें….
    निखिल आनंद गिरि
    http://merekavimitra.blogspot.com/2008/01/blog-post_06.html

  8. Manish Kumar said,

    जनवरी 12, 2008 at 1:08 अपराह्न

    महक उठती हैं जब राशियां तमन्नेयीं बन जाती हैं
    मनीषियों के जज्बातों पैर कुछ इस कदर छाती हैं
    की होश में भी बेहोश रहे, थोडा ही लेकिन मदहोश रहे,
    दील के पैमाने जलते हैं और वो मुश्कुरती हैं

    You are heartly invited to http://www.khawahish.com

    U r amazing…

  9. फ़रवरी 15, 2008 at 4:40 पूर्वाह्न

    aapne meri panktiyon par pratikriya di ………uske liye dhanyavaad.
    kabhi fursat ho to meri website bhi dekhiyega

    aur apna parichey bhi dejiyega

  10. Rewa said,

    फ़रवरी 27, 2008 at 6:12 पूर्वाह्न

    Aapka name bahut achha hai. Your name inspired me to write a sher. and I am putting for you here in your hara-bhara gulshan🙂

    खुश मिज़ाज़ मौसम का काफ़िला चल पड़ा है मंज़िल-ए-इश्क़ पर,
    महक-ए-गुलशन की छाने लगी है हर राह-गुज़र के दिल-ओ-दिमाग़ पर!

    rgds

  11. mehhekk said,

    फ़रवरी 27, 2008 at 10:39 पूर्वाह्न

    es taranum-e-sher se nawazne ke liye bahut shukriya rews,bahut sundar sher hai.

  12. मार्च 21, 2008 at 7:46 अपराह्न

    महक सब से पहले तो आप को होली की बधाई देते हे, ओर फ़िर ध्न्यावाद इतनी सुन्दर कविता के लिये.

  13. मार्च 23, 2008 at 12:36 अपराह्न

    Achhi kavtitaaye likhi hain aapne. Ise banaaye rakhiye.

  14. abyaz khan said,

    मई 6, 2008 at 8:49 पूर्वाह्न

    महक जी मेरी आपसे गुज़ारिश है, कि आप अगर मुझे मुझे अपने ब्लॉग पर एड करें, तो मुझे काफ़ी खुशी होगी।

  15. Rewa Smriti said,

    मई 8, 2008 at 3:24 अपराह्न

    हर एक फूल किसी याद सा महकता है,
    तेरे ख्याल से जागी हुई फिजायें हैं,
    यह सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएं हैं,
    तू पास हो की नहीं फिर भी तू मुकाबिल है।

  16. mehek said,

    मई 8, 2008 at 4:43 अपराह्न

    tere pyar ki dua ka gehra asar hota hai
    mujh sang mehekti hai ye fiza aur sama hasta hai
    yaadon mein tera saath hamesha hi raha hai meri
    tere wajood ka ehsas mere dil mein chalakta hai.

    thanks rews it was refreshing,am not feeling well today,fever,vough,commoncold,seems sever pharengytis,will sleep now,gudnight.

  17. RAZIA MIRZA said,

    जून 12, 2008 at 11:00 पूर्वाह्न

    वाह !क्या खुश्बु है ! महेक के इस महेकते ब्लोग में ! खुदा से दुआ है ..महेक की महेक हमेंशां बरकरार रहे।सारे आलम को महेकाती रहे ।
    मेरे ब्लोग पर कमेन्ट लिखते रहने का शुक्रिया ।
    रज़िया मिर्ज़ा

  18. Rewa Smriti said,

    जुलाई 3, 2008 at 6:07 पूर्वाह्न

    Mehek, this is for you to read about kaushlendra as it’s in marathi🙂

    http://esakal.com/esakal/07032008/Specialnews83EE95862D.htm

  19. Rewa Smriti said,

    अगस्त 23, 2008 at 5:03 अपराह्न

    Where have you been? Generally, I visit three or four blogs including your blog. I just again checked your blog, I thought that you must have written something here, but couldn’t find anything new. I am missing your writing….Please put some poems on your blog.

    Really missing something….I mean it.

    rgds.

  20. Alok Pandey said,

    सितम्बर 17, 2008 at 10:31 पूर्वाह्न

    achchha laga aapke blog par aakar.
    kabhi samay mile to mere blog par bhi aayiye.
    jo hum tum do mil jaye to
    kuchh baat ban jaye
    http://www.pandeyalok.wordpress.com

  21. Rewa Smriti said,

    अक्टूबर 20, 2008 at 12:29 अपराह्न

    Blog Stats – 50,473 hits

    Congratulation for making half century! keep writing…Never stop. All the best!

  22. naaaz saifi said,

    नवम्बर 23, 2008 at 11:55 पूर्वाह्न

    mahak hame bhi batao ki is me id kese banate hai plzzzzzzzzzzzzzzzzz mehek ,,,,,,,

  23. NirjharNeer said,

    नवम्बर 26, 2008 at 11:36 पूर्वाह्न

    aap background color change karen Mahak jii

    khushbu yahan tak aa rahii hai aapke lekhan kii

  24. Rewa Smriti said,

    जनवरी 2, 2009 at 12:47 अपराह्न

    Happy New year to you🙂

  25. अप्रैल 6, 2009 at 6:12 पूर्वाह्न

    यदि ब्लॉग के हेडिंग में भी “महक” अंग्रेजी में ना हो कर हिंदी में हो तो कैसा रहेगा?

  26. mehek said,

    अप्रैल 6, 2009 at 10:17 पूर्वाह्न

    aapki tippani aur es sujhav ka bahut shukran,naam hindi mein hota bahut achha sujhav hai aur hona bhi chahiye,magar hae aise hi pasand hai,shayad aadat ki baathai aur kuch nahi:)

  27. Jhani said,

    अप्रैल 19, 2009 at 1:21 अपराह्न

    ना कोई छू पाए / ना कोई कर सके दीदार / फूलों में मेरा बसेरा … nice introduction. just started read your shayari … i will come back again…

  28. champak said,

    दिसम्बर 1, 2009 at 2:10 अपराह्न

    hello महक जी नमस्कार…!

    मेरी गुस्ताखी माफ़ हो…

    महक का एक नाम खुशबु भी है…तो खुशबु के नाम कुछ पंक्तियाँ…

    दिल में लगा के आग बुझाती है तेरी खुशबु..
    आके करीब दूर क्यूँ जाती है तेरी खुशबु,
    जिसकी “महक ” से फूल भी बनते हैं खुशबूदार,
    क्यूँ मुझको बार-बार सताती है तेरी खुशबु…..?

  29. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 5, 2010 at 2:04 अपराह्न

    Hey Mehek, congratulation for completing 1st century hits in your blog.

    Keep it up dear!

  30. Rewa Smriti said,

    जनवरी 17, 2011 at 5:31 अपराह्न

    Happy Makarsankranti to you too Mehek. Please put some poems to read.

  31. raymond said,

    जनवरी 14, 2012 at 9:41 अपराह्न

    ना कोई छू पाए
    ना कोई कर सके दीदार…. aisa zulm kyon sarkar?

  32. अक्टूबर 21, 2013 at 7:12 अपराह्न

    ” सहसा पानी की एक बूँद के लिए ” पढ़े प्यार की बात और भी बहुत कुछ Online.

  33. RANJIT TIWARI "MUNNA" said,

    नवम्बर 16, 2013 at 2:45 अपराह्न

    wah wah kya baat hai bahut khoob

  34. फ़रवरी 3, 2014 at 2:56 अपराह्न

    wah wah kya baat hai bahut khoob
    madansaxena.blogpost.com


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